हम बादल
हम बादल
धूम-भरे ,काजल धारे,
हम हैं काले-बिक़राले बादल।
हम है जल की धूम,
पवन की चाल ।
कभी दौड़ते अम्बर में,
मृग दौड़े जैसे जंगल मे।।
अवनि पर चरण नही रखते,
बन मतवाला गज कभी झूमते।।
इनका बनता देख आकार,
लगने लगती शक्ल साकार,
पहले जलधर फिर जलधार,
होने लगती पायस की झंकार।।
इनकी एक कडक़ दहाड़ ,
डर जाते पक्षी,नदी ,पहाड़।।