जब तुम मिलने आती हो

जब तुम आती हो,
खिल उठा हृदय ,
पा प्रेम तुम्हारा निश्चय
तब नव अंगों में स्फुरण 
जब तुम चलती दिखती हो,
अपलक रह जाते स्वार्थी नयन 
मुख मौन की मुद्रा लेकर
कह पाते कुछ न मर्म वचन
जब तुम आती जीवन पथ पर 
सौंदर्य-सरस बरसाती मुझ पर 
तुम आती हो तो
उर अंतर ही अंतर मुस्काता है
पर जब जाने की बेला आयी
हृदय व्यथा से भर जाता है