धैर्य
धैर्य
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प्रकृति अपना काम कितना धैर्य से करती है,देखिए शरद से ग्रीष्म आने का धैर्य,ग्रीष्म से आषाढ़ आने का धैर्य,वृक्षों में फल आने का धैर्य,मृदा निमार्ण में धैर्य ,भू-गार्भिक रत्नों के निर्माण में धैर्य ,बीज का वृक्ष बनने में धैर्य
हम प्रकृति के किसी भी कार्य को देखते हैं,हमे जीवन मे धैर्य धारण करने की सीख सदैव मिलती है ।
वास्तव में धैर्य जीवन मे सफलता का मुख्य कारक है,मनुष्य को जीवन मे किसी कार्य को करने में धैर्य में होना अनिवार्य है
अगर आप ऐसा सोचते है कि आपने आज बीज को मृदा में दफनाया है और कल उससे फल आने लगगे तो यह आपके अस्थिर स्वभाव का परिचायक है ।
बीज मृदा से संघर्ष करके बाहर निकलता है,उसमे जैसे ही नव-अंकुर आते हैं ,सूर्य की तीक्ष्ण किरणें उसके बदन को अपनी तीखी रोशनी से बेध देती हैं,वह नव-अंकुरित बीज संघर्ष करता है,अपना अस्तित्व बचाएँ रखने के लिए वह सहता है पवन के थपेड़ो को ;वह सहता है बरसात के ओले को,ठिठुरन पैदा करने वाली शरद के प्रकोप को,
वृक्ष बनने तक वह अनेकानेक समस्यओं को सहन करता है;तब कही जाकर वह वृक्ष के रूप में अपना अस्तित्व बनाये रख पाता है,किन्तु अभी उससे फल की प्राप्ति नही होती,उसे प्रतीक्षा करनी पड़ती है, अनुकूल समय की जब उसे फूल,और उसके बाद फल आते हैं। और फल आने और पुनः फल से लदने के लिए ये प्रतीक्षा अनवरत चलती रहती है....संघर्ष है उसे खड़े रहने में ,सर्दी,गर्मी और बरसात सहते हुए अपने अस्तित्व को बचाये रखने में तथा प्रतीक्षा है फल से लदने की .....
वास्तव में मनुष्य के जीवन मे भी धैर्य इतना ही महत्वपूर्ण जीवन घटक है,
धैर्य मन में साहस भरता है सभ्यता के विकास क्रम में मनुष्य आज मशीनी युग में पहुंच गया है। इस युग की चुनौतियां दिन-ब-दिन विकट होती जा रही हैं और इंसान का सब्र जवाब देने लग गया है। ऐसे समय में संत कबीर की बातें मनुष्य को याद रखनी चाहिए-
कबीर कहते हैं
"धीरे -धीरे रे मना धीरे सब कुछ होय
माली सींचे सौ घड़ा ,ऋतु आये फल होय"
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