कैसी स्वतंत्रता?

आज भी स्वतंत्र भार‍त पर एक प्रश्नचिह्न लगा हुआ है! अगर सचमुच भारत देश स्वतंत्र है, आजाद है तो फिर उस आजादी की, उस स्वतंत्रता की सही मायने में क्या परिभाषा होनी चाहिए, यह आम आदमी की सोच से परे है। 
आज़ादी मिले 73 साल हो गये, पर क्या आज़ादी के लिए मर मिटने वालों के सपने पूरे हुए? क्या आज़ादी मिलने के बाद देश मे ऐसा कुछ हुआ ,जिसके लिए हमारे पुरखों ने अपना सर्वस्व न्यौछावर कर दिया ।?आज अपने आप से यही सवाल पूछने का दिन है. 

आप सभी को स्वाधीनता दिवस की शुभकामनाएँ.

ये कैसी स्वतंत्रता ?
जहाँ सिसकती माँ भारती
अमर शहीदों को पुकारती
किसे सुना रहे ये स्वतंत्रता गान?
जब तड़प रहा है पूरा हिंदुस्तान।
जहाँ,
हरदम आतंकबाद का छाया है।
बच्चों में न पिता का साया है।
जहाँ
हर जगह छूटता बचपन है।
युवाओं की उम्र पचपन है।
भूख से मरते बच्चे हैं।
हर तरफ चोर उचक्के हैं।
धुँए भरी हर गलियाँ हैं।
सुरक्षित नही कलियाँ हैं ।
जहाँ 
रोता,लड़ता मरता किसान है।
बेरोजगारी से युवा परेशान है।
धक्का खाता बुढापा है।
चारो ओर फैला स्यापा है।

    प्रदीप मिश्र (जिज्ञासु) 

आज बस इतना ही
 जय हिंद!!
जय भारत! 🙏

इस ब्लॉग से लोकप्रिय पोस्ट

जब तुम मिलने आती हो